Sunday, 5 August 2012

खुबसूरत



अक्स जिंगदी के पडे जब फ़िके..
वो तो मौत है जो अपनाती है

कोई चाहत है न जरुरत है...
मौत क्या इतनी खुबसूरत है...

जिंदा रहें क्यों बेवजह हम..
जब मौत सोने कि फ़ितरत है..

मौत कि गोद मिल रही हो अगर,
जागे रहने कि क्या जरुरत है..


३१.७.२०१२

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